Chinese naval presence in Hambantota Amar Ujala (Hindi) 20 Aug 2022 Maj Gen Harsha Kakar

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Chinese naval presence in Hambantota Amar Ujala (Hindi) 20 Aug 2022

Chinese naval presence in Hambantota Amar Ujala (Hindi) 20 Aug 2022

          चीनी जहाज युआन वांग-5 भले ही श्रीलंकाई बंदरगाह पर रुका है, लेकिन उसका नियंत्रण चीनियों के हाथ में है। इससे पहले, वर्ष 2014 में दो चीनी पनडुब्बियां, जिसमें एक परमाणु शक्ति वाली पनडुब्बी भी थी, भारत की आपत्तियों के बावजूद श्रीलंका में रुकी थीं। भारत की चिंता इस तथ्य से उपजी है कि युआन वांग मूलतः बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रहों का पता लगाने के लिए तैयार किया गया है, जिसके बारे में यह भी दावा किया जाता है कि यह जासूसी जहाज संचार और अन्य डाटा का पता लगाता है। यह ओडिशा तट स्थित अब्दुल कलाम परीक्षण रेंज से दागी गई भारतीय बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगा सकता है और उनकी सीमा और सटीकता को माप सकता है। इस जहाज की हवाई पहुंच 750 किलोमीटर है, जो दक्षिण भारत स्थित भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों को अपनी निगरानी के दायरे में ला सकती है। इस जहाज को समुद्री सर्वेक्षण के लिए भी तैयार किया गया है, जो पनडुब्बी संचालन के लिए आवश्यक है। चीनी वर्षों से ऐसा करते आ रहे हैं। भारत को इस बात की चिंता है कि भविष्य में अन्य चीनी नौसैनिक जहाज श्रीलंका पहुंच सकते हैं।

चिंता का एक कारण यह भी है कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कोलंबो बंदरगाह पर नहीं, बल्कि चीनी नियंत्रित हंबनटोटा बंदरगाह पर रुका है। इस जहाज का स्वागत अन्य लोगों के साथ कोलंबो स्थित चीनी राजदूत ने किया, जो इस क्षेत्र में चीनी जहाज के आगमन के महत्व को प्रदर्शित करता है। तथ्य यह है कि यह जहाज भारतीय चिंताओं के बावजूद हंबनटोटा में रुका, जिसे चीन की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। इस जहाज की रहस्यमय प्रकृति तब स्पष्ट हुई, जब जहाज की अगवानी करने वाले चीनी राजदूत को भी जहाज पर चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। भारत अपने हितों के क्षेत्र में सभी चीनी नौसैनिक जहाजों की आवाजाही पर नजर रखता है, इसलिए हिंद महासागर में प्रवेश के बाद से युआन वांग-5 की गति का अनुमान लगा सकता है। हालांकि श्रीलंकाई लोगों ने कहा कि वे नहीं चाहते कि हंबनटोटा का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाए, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम है, क्योंकि बंदरगाह एक चीनी कंपनी के नियंत्रण में है।

श्रीलंका ने यह कहते हुए डॉकिंग (रुकने) की अनुमति देने के अपने निर्णय का बचाव किया कि यह जहाज एक अनुसंधान जहाजकी श्रेणी के तहत बंदरगाह पर आया था। इस जहाज में चीनी नौसैनिक हैं, इसलिए इसे अनुसंधान जहाज नहीं माना जा सकता है। चीनी राजदूत ने संभवतः जहाज को रुकने देने की बीजिंग की इच्छा पर इसलिए जोर दिया, क्योंकि बंदरगाह चीनी कंपनी के अधीन है और जहाज में युद्ध जैसे सामान नहीं हैं, इसलिए इसकी आवाजाही को रोका नहीं जा सकता है, और समझौते के तहत श्रीलंका सरकार के पास सीमित विकल्प हैं। चीन ने हंबनटोटा में रुकने के अपने फैसले का बचाव करते हुए दावा किया, ‘युआन वांग-5 की समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय आम रिवाज के अनुरूप हैं।

भारत के लिए यह हंबनटोटा में रुकने वाले चीनी नौसैनिक जहाजों की एक शृंखला की शुरुआत हो सकती है। दीर्घ काल में इस बंदरगाह का सैन्यीकरण भी किया जा सकता है। भले ही श्रीलंका भारत के करीब है और विशेष रूप से आर्थिक पतन के बाद सहायता के लिए भारत पर निर्भर है, लेकिन वह एक स्वतंत्र देश है, जिसके चीन के साथ अपने संबंध हैं। श्रीलंका पर चीन का आठ अरब डॉलर का बकाया है, जबकि आर्थिक पतन से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे श्रीलंका को भारत चार अरब डॉलर की सहायता दे रहा है। इस तरह से भारत श्रीलंका को कुछ हद तक ही मदद कर सकता है, लेकिन उससे आगे श्रीलंका सरकार स्वयं अपना निर्णय लेगी। एक बार जब श्रीलंका ने जहाज को रुकने की अनुमति देने की घोषणा कर दी, उसके बाद भारत सरकार ने कोई बयान नहीं दिया।


यह संभव है कि श्रीलंकाई नेतृत्व ने भारत से परामर्श किया हो और अपनी दुविधा बताई हो, जिसे भारत ने मान लिया होगा। भारत ने चीनी जहाज के आगमन से ठीक एक दिन पहले श्रीलंका को एक डोर्नियर विमान उपहार में दिया था, जिसका अर्थ है कि युआन वांग-5 के रुकने का भारत-श्रीलंका संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। चीनी जहाज शीघ्र ही हंबनटोटा बंदरगाह से प्रस्थान कर सकता है, हालांकि, अगले कुछ महीनों के लिए वह हिंद महासागर में रहेगा और भारतीय गतिविधियों की निगरानी के साथ-साथ समुद्री सर्वेक्षण भी करेगा। भारतीय नौसैनिक एजेंसियां इस जहाज की निगरानी करती रहेंगी, क्योंकि यह भारत के हितों के क्षेत्र में काम करेगा। चीनी जहाजों की आवाजाहीकी निगरानी से ज्यादा जरूरी यह है कि हम अपने हितों के क्षेत्र में चीनियों का मुकाबला करने के लिए अपनी खुद की नौसैनिक शक्ति का विकास करें।

The docking of the Chinese ship, Yuan Wang 5 (Yuan Wang means Long View and 5 implies the fifth in the series of the Yuan Wang class of ships) at Hambantota port in Sri Lanka on 16th Aug against the concerns of India and the US raised eyebrows. The ship, earlier scheduled to arrive on 11th Aug, was delayed due to Indian concerns. It made no other halt, enroute from China, though slowed down its speed, while the Chinese embassy in Columbo convinced the Sri Lankan leadership to permit it to dock at Hambantota. The Chinese claimed it was docking solely for refuelling and crew refreshment. The ship carries a crew of approximately 2000.

          Hambantota port in Sri Lanka was constructed with a Chinese loan in 2010. The reason why Sri Lanka failed to exploit the port was that most ships bypassed Hambantota and halted at the already established Columbo port located close by. The Sri Lankan government failed to repay loans and the port incurred heavy losses. Ranil Wickremesinghe, the then Sri Lankan PM, signed an agreement to transfer the port to a Chinese company on a 99-year lease.

India did raise concerns but for Sri Lanka there was limited choice. Hence, though the port where Yuan Wang docked is in Sri Lanka, it is controlled by the Chinese. Earlier in 2014, two Chinese submarines, including a nuclear-powered submarine, halted in Sri Lanka against Indian objections.  

          Indian concerns stem from the fact that the Yuan Wang though basically designed to track ballistic missiles and satellites is also claimed to be a spy ship tracking communication and other data. It can track Indian ballistic missiles fired from the Abdul Kalam testing range off the Odisha coast and gauge their range and accuracy. The ship possesses an ariel reach of 750 Kms bringing Indian defence installations, located in South India, within its monitoring reach. The ship is also designed to conduct oceanic surveys which are essential for submarine operations. The Chinese have been doing this over the years.

          For India, such a visit could set a precedence for other naval vessel visits in the future. An additional matter of concern was that the vessel did not halt at the internationally recognized port of Columbo but at the Chinese controlled Hambantota port. The ship was received amongst others by the Chinese Ambassador to Columbo, displaying the importance China wished to project on its arrival to the region. The fact that the ship docked despite Indian concerns is considered a diplomatic victory for China. The secretive nature of the ship was evident when even the Chinese ambassador, who received the ship, was not permitted to board.

          India monitors movement of all Chinese naval vessels in its area of interest, thus could gauge the movement of the Yuan Wang 5 from its entry into the Indian Ocean. While the Sri Lankans stated that they do not want Hambantota to be used for military purposes, there is little they could do as the port is under the control of a Chinese company. They defended their decision to permit its docking by stating that the ship came to the port under the category of a ‘research ship.’

The ship has Chinese naval personnel on board and hence cannot realistically be considered a research vessel. The Chinese ambassador possibly pushed Beijing’s desire of docking the ship by insisting that since the port is under the Chinese and the ship does not carry war-like stores, its movement cannot be stopped, and the Sri Lankan government has limited choices under the agreement. China also defended its decision to berth in Hambantota claiming, ‘marine scientific research activities of the Yuan Wang 5 are consistent with international law and international common practice.’

          For India, this could be the beginning of a series of Chinese naval vessels halting in Hambantota. It could also imply militarizing the port in the long term. The fact remains that Sri Lanka, though close to India and dependent on it for aid, especially after its economic collapse, remains a free country which has its own relations with China. While Sri Lanka owes China about USD 8 Billion, India is providing it with USD 4 Billion aid while it struggles to overcome its economic collapse. Thus, India can push Sri Lanka to some level but beyond that the Sri Lankan government will make its own decisions.

          Once the Sri Lankans announced their decision to permit the ship to dock, the Indian government gave no statement. It is possible that the Sri Lankan leadership would have consulted India and explained its dilemma which India would have accepted. India gifted a Dornier aircraft to Sri Lanka just a day prior to the arrival of the ship, implying that the docking of Yuan Wang 5 would have no impact on India-Sri Lanka relations.

The ship may depart Hambantota port shortly, however, will remain in the Indian Ocean for next few months, monitoring Indian activities as also conducting Oceanic surveys. Indian naval agencies will continue observing the ship as it operates in areas of India’s interests. What is more essential than monitoring the movement of Chinese vessels is our area of interest is developing our own naval power to counter the Chinese.