Days in Pakistan’s calendar in support of Kashmir Chanakya Forum 12 Jan 2022 Maj Gen Harsha Kakar

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कश्मीर के समर्थन में पाकिस्तानी कैलेंडर के कई दिवस निर्धारित

Days in Pakistan’s calendar in support of Kashmir Chanakya Forum 12 Jan 2022

          पाकिस्तान हर साल 05 जनवरी को ‘आत्मनिर्णय का अधिकार’ दिवस के रूप में मनाया करता है। यह 1949 का वह दिन था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जम्मू और कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह कराने के लिए प्रतिबद्धता दिखायी थी। इमरान खान ने इस साल 05 जनवरी को ट्वीट किया, ‘कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह की यूएनएससी की प्रतिबद्धता अधूरी है। हिंदुत्व मोदी सरकार ने यूएनएससी के प्रस्तावों, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानूनों और चौथे जिनेवा कन्वेंशन सहित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का खुलेआम उल्लंघन किया है; और जम्मू और कश्मीर की स्थिति और जनसांख्यिकी को बदलने की मांग करके युद्ध अपराध किया है। जम्मू और कश्मीर पर संकल्प संख्या 47 को 21 अप्रैल 1948 को यूएनएससी द्वारा अपनाया गया था।

पाकिस्तान यह भूल गया है कि संकल्प के चरणों का पालन करने से इनकार करने से यह शून्य हो गया है। यह इस तथ्य की भी अनदेखी करता है कि शिमला समझौते और लाहौर घोषणा ने यूएनएससी के प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया है और कश्मीर मुद्दे को किसी भी वैश्विक शक्ति या संगठन द्वारा मध्यस्थता को रास्ते से हटाकर द्विपक्षीय बना दिया है। 05 जनवरी उन दिनों में से एक है जब पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को वैश्विक सुर्खियों में रखने की उम्मीद कर रहा है। कई अन्य भी हैं।

हर साल 05 फरवरी को कश्मीर के साथ एकजुटता की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का कोई विशेष महत्व नहीं है। इसे 1990 में नवाज शरीफ द्वारा तय किया गया था और तब से यह प्रचलन में है। यह एक राष्ट्रीय अवकाश भी है। पाकिस्तान में इसे ‘यूम-ए-यखजेहती-ए-कश्मीर’ कहा जाता है और सुबह 10 बजे एक मिनट का मौन रखा जाता है। इस दिनपाकिस्तान में रैलियों का आयोजन होता है जबकि उसके राजनेता कश्मीरियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए भारत विरोधी बयान देते हैं। मूल विषय घाटी में जनमत संग्रह और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को उठाना है। खुद द्वारा आतंकवाद के समर्थन का कोई उल्लेख नहीं होता जो प्रतिदिन निर्दोष कश्मीरियों को अपना शिकार बनाता है।

पाकिस्तान में 05 अगस्त को भी चिह्नित किया गया हैजिस दिन भारत ने धारा 370 को हटा दिया था। इसे ‘यूम-ए-इस्तेहसाल’ (शोषण का दिन) के रूप में मनाया जाता है। धारा 370 को निरस्त करने के भारतीय निर्णय ने पाकिस्तान को झकझोर दिया और उसके पास भारत के खिलाफ निराशा और गुस्से को प्रदर्शन करने के लिए अपने कैलेंडर में एक और दिन चिह्नित करने के अलावा कोई जवाब नहीं था। इमरान खान ने पिछले साल 05 अगस्त को कहा था, ‘इन दो वर्षों मेंदुनिया ने अभूतपूर्व उत्पीड़न देखा है।’ 2019 मेंइमरान ने धारा को निरस्त करने के भारतीय फैसले के खिलाफ हर शुक्रवार को आधे घंटे विरोध प्रदर्शन का आदेश दिया था। उन्हें पहले शुक्रवार के बाद ही उस आह्वान को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि मजबूर सरकारी कर्मचारियों के अलावा कोई उसका समर्थक नहीं था।

2019 मेंजिस वर्ष भारत ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कियापाकिस्तान ने निर्णय का विरोध करने के लिए भारतीय स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त को काला दिवस घोषित किया था। इमरान ने यहां तक जोर देकर कहा कि भारत के साथ किसी भी बातचीत के लिए मूल शर्त अनुच्छेद 370 की बहाली होगी। पाकिस्तान को दो वर्षों से अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए उसके आह्वान का कोई समर्थन नहीं मिला है।

पाकिस्तान 13 जुलाई को कश्मीर शहीद दिवस के रूप में चिह्नित करता हैजो 1931 में राज्य बलों द्वारा मारे गए 21 प्रदर्शनकारियों की याद में है। 2019 तक एलओसी के दोनों ओर यह एकमात्र आम दिन था। जम्मू और कश्मीर में 2019 से सार्वजनिक अवकाश होना बंद हो गया। पिछले सालइमरान खान ने ट्वीट किया, ‘हम जम्मू-कश्मीर के अवैध और दमनकारी कब्जे के खिलाफ कश्मीर के लोगों के संघर्ष के लिए उन्हें सलाम करते हैं। 13 जुलाई, 1931 के शहीदआज के कश्मीरी प्रतिरोधकों के पूर्वज थे। 2018 मेंपाकिस्तान ने घाटी में ताजा हिंसा को भड़काने की उम्मीद से 08 जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों द्वारा मारे गये आतंकवादी बुरहान वानी को सम्मानित करते हुए डाक टिकट जारी किया, जिसे नजर अंदाज कर दिया गया।

जम्मू और कश्मीर के भारत में विलय के उपलक्ष्य में पाकिस्तान 27 अक्टूबर को काला दिवस के रूप में मनाता है। वह विश्व भर में ऐसा करता है और अपने सभी दूतावासों को कश्मीर विवाद को उजागर करने के लिए विरोध प्रदर्शन और कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहता है। वर्षों से हो रहा यह आयोजन किसी भी तरह का समर्थन जुटाने में विफल रहा है। यूके और कनाडा जैसे देशों मेंपाकिस्तान खालिस्तान समर्थकों को आकर्षित करने का प्रबंध करता है। सऊदी अरब और यूएई ने उस दिन किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पाक दूतावास पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके विपरीतभारत 22 अक्टूबर को काला दिवस के रूप में चिह्नित करता हैजिस दिन पाक हमलावरों ने कश्मीर में प्रवेश किया था।

हालाँकिपाकिस्तान जानता है कि उसका ब्लैक डे कार्यक्रम विश्व स्तर पर एक वित्तीय बर्बादी है। 2021 मेंइसे व्यर्थता समझते हुएपाक विदेश मंत्रालय ने इसको मनाने के लिए प्रति दूतावास केवल 1000 अमरीकी डालर आवंटित किया।

इसके अलावापाकिस्तान 19 जुलाई को यौम-ए-इल्हाक-ए-पाकिस्तान (पाकिस्तान में प्रवेश) दिवस के रूप में मनाता है। 1947 में आज ही के दिन पाकिस्तान ने दावा किया था कि कश्मीर विधानसभा ने उसे स्वीकार करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। इस घटना को केवल पीओके में रैलियों के आयोजन के जरिये मनाया जाता है।

पाकिस्तान के रक्षा दिवस, 06 सितंबर, 1965 में जीत का जश्न मनाने और 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस सहित अन्य प्रमुख राष्ट्रीय दिवसों पर भीइसके नेता केवल कश्मीर की बात करते हैं। इनके नेताओं के संबोधन में देश के विकास या समस्याओं का कोई जिक्र नहीं होता बल्कि सिर्फ कश्मीरकश्मीर और कश्मीर का जिक्र रहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कश्मीर सभी पाकिस्तानियों को एकजुट करने का नाम है।

इन भारत विरोधी तिथियों परपाकिस्तान को घाटी में कट्टरपंथी हुर्रियत गुट से कुछ समर्थन प्राप्त था। कहीं-कहीं पाक के झंडे फहराते नजर आते हैं। इस गुट के टूटनेएनआईए की छापेमारी और हवाला फंड के प्रवाह को रोकने से उनका समर्थन समाप्त हो गया है। घाटी पाकिस्तान के समर्थन के आह्वान को नजरअंदाज करती है।

यहां तक कि पाकिस्तान के भीतर भीयह महसूस किया जा रहा है कि उसने कश्मीर पर वैश्विक समर्थन खो दिया है। ओआईसीजिस पर पाकिस्तान को भरोसा थाने कश्मीर पर एक विशेष सत्र की उसकी मांगों की अनदेखी की है। इन तिथियों को मनाना पाकिस्तान के लिए आर्थिक नुकसान का सबब बना हुआ हैलेकिन उन्हें रोक देने से राजनीतिक और उग्रवादी समूहों की ओर से घनघोर विरोध होगाइसलिए पाकिस्तान की सरकार इन तिथियों का अनुसरण करती रहती है।

पाकिस्तान के आधिकारिक कैलेंडर में भारत विरोधी और कश्मीर समर्थक दिवस इस क्षेत्र के प्रति उनके जुनून को ही उजागर करते हैं। पाकिस्तान के कैलेंडर में अभी कुछ महीने ऐसे बाकी हैं जिनमें कश्मीर का जिक्र नहीं है। भारत विरोधी अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए उसे उन महीनों में भी एक दिन जोड़ना होगा। हालांकि ऐसा करने से न तो भारत पर कोई फर्क पड़ेगा और न ही दुनिया पर कोई असर पड़ेगा।

 

Pakistan marks 05 Jan every year as ‘Right to Self-determination’ day. This was the day in 1949 when the UN Security Council supposedly committed to holding a UN supervised plebiscite in J and K. Imran Khan tweeted on 05 Jan this year, ‘The UNSC commitment of an UN-supervised plebiscite in Kashmir remains unfulfilled as the Hindutva Modi govt brazenly violates UNSC resolutions, international humanitarian laws and international conventions including the 4th Geneva Convention; and commits war crimes by seeking to alter status and demography of J and K.’ Resolution No 47 on J and K was adopted by the UNSC on 21st Apr 1948.

Pakistan forgets that their refusal to adhere to the resolution stages made it null and void. It also ignores the fact that the Shimla Agreement and Lahore declaration have sidelined the UNSC resolution and made the Kashmir issue bilateral pushing mediation by any global power or organization out of the way. 05 Jan is just one of the days which Pak marks hoping to keep the Kashmir issue in global limelight. There are many others.

          05 February every year is marked as annual day of solidarity with Kashmir. The day has no special significance. It was nominated by Nawaz Sharif in 1990 and has been in vogue since then. It is a national holiday. In Pakistan it is termed as ‘Youm-e-Yakhjehti-e-Kashmir’ and one-minute silence is observed at 10 am. On this day, Pakistan organizes rallies while its politicians release statements which are anti-India while displaying solidarity with Kashmiris. The basic theme remains conduct of plebiscite and human rights violations in the valley. There is no mention of its own support to terrorism which is taking a daily toll on the lives of innocent Kashmiris.

          Pakistan also marks 05 August, the day India abrogated Article 370 as ‘Youm-e-Istehsal’ (the day of exploitation). The Indian decision to abrogate the article shocked Pakistan and it had no answer, but to add yet another day in its calendar displaying frustration and anger against India. Imran Khan stated on 05 August last year, ‘In these two years, the world has witnessed unprecedented oppression.’ In 2019, Imran had ordered half hour protests every Friday against the Indian decision to abrogate the article. He was forced to scrap the call after the first Friday as there were no supporters except forced government employees.

In 2019, the year India abrogated article 370, Pakistan had declared Indian Independence day, 15th August, as black day to protest the decision. Imran even insisted that the basic precondition for any talks with India would be restoration of article 370. Pakistan has over the years received no support for its calls for restoration of article 370.

          Pakistan marks 13th July as Kashmir martyrs’ day, which is in remembrance of the 21 protestors killed by state forces in 1931. This was the only common day marked on both sides of the LOC till 2019. It stopped being a public holiday in J and K from 2019. Last year, Imran Khan tweeted, ‘we salute the people of Kashmir for their ongoing struggle against the illegal and oppressive Indian occupation of Jammu and Kashmir. The martyrs of July 13, 1931, were the ancestors of today’s Kashmiri resistance.’ In 2018, Pakistan released stamps honouring Burhan Wani, the terrorist eliminated by security forces on 08 Jul 2016 on this date, hoping to incite fresh violence in the valley. It was ignored.

          Pakistan observes Oct 27th as Black day to mark the accession of J and K to India. It does so on the global stage asking all its embassies to organize protests and events to highlight the Kashmir dispute. Over the years the event has failed to muster any support. In countries like the UK and Canada, Pakistan manages to draw in Khalistan supporters to boost its ranks. Saudi Arabia and the UAE have banned the Pak embassy from organizing any event on that day.  On the contrary, India marks 22nd Oct, the day Pak raiders entered Kashmir, as Black day.

However, Pakistan knows that its Black day event is globally a financial waste. In 2021, understanding it futility, the Pak foreign affairs ministry allocated just USD 1000 per embassy for its conduct.

          In addition, Pakistan marks 19th July as the Youm-e-Illhaq-e-Pakistan (accession to Pakistan) day. It was on this day in 1947 that Pakistan claims the Kashmir assembly passed a resolution acceding to it. This event is marked by rallies only in POK.

Even on other major national days including its defence day, 06 September, supposedly celebrating victory in 1965, and Pakistan day on 23rd March, its leaders only speak of Kashmir. There is no mention of development or problems faced by the country in addresses by its leaders but just Kashmir, Kashmir and Kashmir. It appears that Kashmir is the rallying call for all Pakistanis.

          On these anti-India days, Pakistan had some support in the valley from the hard line Hurriyat faction. Pak flags would be seen fluttering in some parts. With the breaking of this faction, raids by NIA and stopping flow of Hawala funds, the support has died down. The valley ignores Pakistan’s calls for support. 

Even within Pakistan, there is a realization that it has lost global backing on its calls for Kashmir. The OIC, which Pakistan had been banking on has ignored its demands for a special session on Kashmir. These events remain a financial drain but stopping them would imply a political and militant group backlash within, hence governments of the day continue with pursuing them.

          The anti-India, pro-Kashmir days in Pakistan’s official calendar only highlights their obsession with the region. There are a few months still left when Kashmir does not find a mention in Pakistan’s calendar. It must add one day in those months also to display its anti-India streak. Not that even this would make a difference to either India or the world.