सैन्य सुरक्षा ही एकमात्र केंद्र बिंदु

Total Views 342 , Today Views 6 

सैन्य सुरक्षा ही एकमात्र केंद्र बिंदु

1.  मौजूदा  सर्व व्यापी कोविड-19 महामारी के दौरान कुपवाड़ा की वारदात जिसमें हमारे पांच जांबाज बेमौत मारे गए, भविष्य में होने वाले दुस्साहसों की गंभीर चेतावनी है। वह कौन सा नुस्खा है जो पाकिस्तानी हुक्मरानों तथा सत्ता के दलालों के  जेहन या दिमाग में ऐसी नापाक  हरकतें करने से रोकेगा। मार्च महीने की 1 तारीख से ही 12 वारदातों में सुरक्षा बलों के 7 जवान 21 आतंकवादी सहित केंद्र शासित जम्मू कश्मीर के साथ नागरिक मारे गए.  यदि हम विगत कुछ दिनों के संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाओं पर नजर डालें तो स्थिति और भी भयावह प्रतीत होगी । इस वर्ष की 1 तारीख से 23 फरवरी तक पाकिस्तानी फौज ने 646 बार संघर्षविराम के उल्लंघन को अंजाम दिया है । जैसा की सर्वविदित है संघर्ष विराम के उल्लंघन का मकसद इसकी आड़ में नियंत्रण रेखा से आतंकवादियों की घुसपैठ कराना । अप्रैल के आरंभ ही से ऐसी घटनाओं की रफ्तार तेज हो गई है और जैसे  जैसे गर्मी का मौसम आता जाएगा आतंकवादी हमलों में भी तेजी आती जाएगी ।
2.   हालिया 8 अप्रैल को इकोनामिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एलओसी पर आतंकवादियों की ढ़ांचागत व्यवस्था एवं लांच पैड पर सक्रियता शुरू हो गई है और पाकिस्तान के  आत्मघातियों की भारत में घुसपैठ के प्रयासों में तेजी आगई है । पाकिस्तानी साजिशें और कश्मीर घाटी में  बढ़ती सरगर्मी साफ इशारा कर रही है कि भारत अपनी आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा के निमित्त हर प्रकार से सतर्क रहे ।  साथ ही हमें किसी भी तरह के मानवतावादी   भूलावे में नहीं पड़ना चाहिए कि मौजूदा  विश्वव्यापी   करोना या कोविड-19 महामारी की विभीषिका के कारण पाकिस्तान अथवा चीन किसी तरह के कुचक्र को भारत की तरफ चलाने से परहेज करेंगे।
चीनी  चाल बाजिया
3.   कोविड-19 पर पूरी तरह काबू पाने के पश्चात चीन  ने अब अपने तंतुओं को आर्थिक एवं सामरिक क्षेत्रों में फैलाना आरंभ कर दिया है।  लचर होती भारतीय शेयर बाजार की घड़ी मैं एचडीएफसी बैंक के एक करोड़ 71लाख शेयरों का पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा खरीदना भारतीय अर्थव्यवस्था को झपट्टेबाजी से चोटिल करने जैसा दाव था ; परंतु भारत ने अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन करके चीन द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से हमारी अर्थव्यवस्था पर काबू पाने की नीति को धराशाई कर दिया। भारत ही नहीं चीन दुनिया के अन्य देशों में भी निवेश कर रहा है परंतु ऑस्ट्रेलिया , जर्मनी , स्पेन इत्यादि देशों ने चीन की कुटिल नीति को समझते हुए अपने यहां के नियमों को सख्त कर दिया है।  बिना युद्ध लड़े ही जीत हासिल करना चीन के प्राचीन विचारक सुन जू का पुराना मुहावरा रहा है ।  आज जब अनेकों देशों की अर्थव्यवस्था कोविड-19 के  दंश से ग्रसित है चीन अपने प्राचीन सिद्धांत को कामयाब करने में प्रयासरत है। भारत ने सही समय पर अपनी ऐतिहासिक चाणक्य नीति  के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कानून में संशोधन करके ऐसे विस्तारवादी देश की कुटिल नीतियों को विफल कर दिया  जिसके साथ लंबी  अनिर्णित भौगोलिक सीमा  संलग्न  है।  इन सब के साथ चीन अपनी उच्च तकनीक वाली नेवी लैंडिंग शिप डॉक और घातक ड्रोन  भी कोविड-19 के बावजूद बनाए जा रहा है। वॉइस ऑफ अमेरिका के मुताबिक   ताइवान  के समुद्री तट पर चीन की सैनिक गतिविधियां एवं दक्षिणी चाइना समुद्र में भी  पेट्रोलिंग की हलचल चल रही है।  विगत दिनों  वियतनाम के  मछुआरों की नौका का डुबाना भी  गुंडागर्दी ही तो है।  बिजनेस इंसाइडर इंडिया की खबर के मुताबिक चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ भूभाग को अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा में दिखा रहा है।

 कूटनीतिक पैंतरेबाजी

4.   106 बिलियन डॉलर के कर्ज के बोझ से निरंतर बिगड़ती हुई अर्थव्यवस्था , कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों और लड़खड़ाती आंतरिक सुरक्षा के वजह से पाकिस्तान एक विफल राज्य के कगार पर पहुंच रहा है।  जैसा कि पहले भी होता रहा है व्यवस्था सुधार के बहाने पाकिस्तानी फौज  ने देश की बागडोर अपने हाथों में ले लिया है।  ऐसी हालत में पाकिस्तान अपनी चौतरफा  विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए तथा चीन  कोविड-19 प्रकरण की किरकिरी में भारत को अन्य देशों का साथ देने से रोकने हेतु कूटनीतिक दबाव डालने का भरपूर प्रयास करेंगे। यहां भी चीन  वही बिना हथियार उठाए भारत पर विजय हासिल करने की तरकीब का प्रयोग करेगा।
नीतिगत सलाह
5.   हमें हर तरह की संभावनाओं के लिए तैयार रहना होगा। प्रथमतया हमारे खुफिया तंत्र को निरंतर चाक-चौबंद रहते हुए एक पल भी आत्म विभोर नहीं होना होगा। हर प्रकार के परंपरावादी, आत्मघाती , जैविक , रासायनिक एवं आणविक  धरातल पर सतत सतर्कता बरतनी होगी। कश्मीर क्षेत्र विशेष निगाह रखनी होगी। यद्यपि कोरोना वायरस से मुकाबला हमारी प्राथमिकता है परंतु सशस्त्र सेनाओं के संसाधनों का बुद्धिमत्ता पूर्वक उपयोग सर्वोपरि लक्ष्य होना चाहिए। बेशक भारतीय सेनाएं बाह्य आक्रमण जैसे प्राथमिक एवं आंतरिक सुरक्षा के माध्यमिक खतरों से बखूबी निपटने में   सक्षम हैं  परंतु कोविड-19 जैसी पैशाचिक शक्ति से निपटने में नौकरशाही की भूमिका अग्रणी होनी चाहिए । तीसरे इस अत्याधुनिक युग के दौरान अनेकों अप्रत्याशित माध्यमों जैसे आखनिक ( Hybrid ) छद्म (Proxy ) , साइबर , अंतरिक्ष , विद्युत चुंबकीय (Electronic) , सुचना प्रोद्योगिकी (Information Technology ),  मनोवैज्ञानिक तथा जैविक इत्यादि से आक्रमण किए जा सकते हैं।देश एवं समाज हित में हर एक नागरिक को एक मत होकर तालमेल से कार्य करना होगा। चौथे सैन्य शक्ति की और  भी संहारक बनाने की दृष्टि से चल रहे प्रयासों जैसे राफेल जेट , S400 ,  सी गार्जियन , हथियारबंद ड्रोन , तथा P-81 एंटी सबमरीन युद्धक उपकरण वगैरह पर मजबूती से आगे बढ़ते रहना है। साथ ही मेक – टू  के तहत स्वदेशी उत्पादों पर उत्साह पूर्वक आगे बढ़ना है। आखरी पर अंतिम नहीं SAARC  के अलावा भी अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अन्य देशों से कूटनीतिक व मित्रवत संबंध स्थापित करते हुए पाकिस्तान  के प्रत्येक  चाल  को मात देनी है। ड्रैगन की विष दंतों से अनवरत सावधान रहना होगा। जापान , अमेरिका , इंडिया, आस्ट्रेलिया (QUAD) तथा जापान ,अमेरिका , इंडिया (JAI) जैसे अंतरराष्ट्रीय संधियों से अपना पक्ष मजबूत करना होगा ।